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विविधीकृत वृद्धि

नए कॉर्पोरेट योजना के अनुसार, एनटीपीसी एक विविध मिश्रित ईंधन में शामिल 56% कोयला, 16% गैस, 11% परमाणु ऊर्जा, 9% नवीकरणीय ऊर्जा और 8% जल विद्युत आधारित क्षमता के साथ, वर्ष 2032 तक 128 गीगावाट संस्थापित क्षमता की परिकल्पना है ।

इस तरह, वर्ष 2032 तक एनटीपीसी की स्थापित क्षमता की 28%, कार्बन मुक्त ऊर्जा स्रोतों पर आधारित होगी । इसके अलावा, कोयला आधारित क्षमता तेजी से जैसे उच्च कुशल, कम उत्सर्जन प्रौद्योगिकी सुपर क्रिटिकल और अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल पर आधारित होगी । इस विकास के साथ साथ, एनटीपीसी अपने विद्युत स्टेशनों के बेड़े के लिए ईंधन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विकल्पों में से एक सामरिक मिश्रण का उपयोग करेगा करेगी ।

इसके रास्ते में आ रहे  अवसरों, व्यापार के वातावरण में बदलाव के कारण को देखते हुए, एनटीपीसी ने ऊर्जा मूल्य श्रृंखला के साथ व्यापार संलग्न में अपनी रणनीति और विविधता में परिवर्तन बनाया है । विविधीकरण की प्रक्रिया में एनटीपीसी लिमिटेड ने प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ कार्यनीतिक गठनबंधन और संयुक्त उद्यम विकसित किए हैं ।  एनटीपीसी ने अपनी ऐश उपयोगिता व्यवसाय को विकसित करने में भी लंबे समय से प्रगति की है ।


  • हाइड्रो पावर : देश में हाइड्रो पावर वृद्धि को गति देने के लिए और विद्युत उत्‍पादन का एक संतुलित पोर्टफोलियो बनाए रखने के लिए एनटीपीसी ने हिमाचल प्रदेश में 800 मेगावॉट कोलडेम हाइड्रो परियोजना के साथ हाइड्रो पावर उत्पादन में प्रवेश किया है। उत्तराखण्‍ड में भी दो अन्‍य परियोजनाएं ली गई हैं।
  • अक्षय ऊर्जा: अपने मिश्रित ईंधन को व्यापक आधार करने के लिए ,एनटीपीसी की नवीकरणीय संसाधनों के माध्यम से वर्ष 2017 तक लगभग 1,000 मेगावाट की क्षमता वृद्धि का की योजना है ।
  • परमाणु ऊर्जा: देश में परमाणु बिजली परियोजनाओं के विकास के लिए एक संयुक्त उद्यम कंपनी “अनुशक्ति विद्युत् निगम लिमिटेड” (एनपीसीआईएल की 51% हिस्सेदारी और एनटीपीसी की 49% हिस्सेदारी के साथ) का गठन किया गया है ।
  • कोयला खनन: ईंधन सुरक्षा के सृजन के लिए एक प्रमुख पश्‍चगामी समेकन अभियान में एनटीपीसी लिमिटेड ने वर्ष 2017 तक अपनी केप्टिव खानों से लगभग 20 प्रतिशत आवश्‍यकता पूरी करने के लक्ष्‍य से कोयला खनन व्‍यापार में कदम रखा है। भारत सरकार ने एनटीपीसी को अब तक 7 कोयला ब्‍लॉक आबंटित किए हैं, जिसमें 2 ब्‍लॉक का विकास संयुक्‍त उद्यम मार्ग से किया जाना है।
  • विद्युत व्‍यापार: एनटीपीसी विद्युत व्‍यापार निगम लिमिटेड (एनवीवीएन) पूर्ण स्‍वामित्‍व की सहायक कंपनी का सृजन एनटीपीसी की परिसंपत्तियों की अनुकूलतम उपयोगिता की ओर विद्युत व्‍यापार हेतु किया गया था। यह देश की दूसरी सबसे बड़ी विद्युत व्‍यापार कंपनी है। देश में विद्युत व्‍यापार की सुविधा देने के लिए एनटीपीसी, एनएचपीसी, पीएफसी और टीसीएस के बीच विद्युत के आदान प्रदान के लिए एक संयुक्‍त उद्यम 'राष्‍ट्रीय विद्युत विनिमय लिमिटेड' का गठन विद्युत विनिमय के प्रचालन हेतु किया गया है।
  • राख व्‍यापार: एनटीपीसी राख निपटान की चुनौती को एक अवसर के रूप में बदलने के लिए अपने विद्युत स्टेशनों पर उत्‍पन्‍न राख की उपयोगिता पर ध्‍यान केन्द्रित करती है। इस राख का उपयोग अब सीमेंट कंपनियों और ईंट निर्माताओं द्वारा कच्‍ची सामग्री के रूप में किया जा रहा है। एनवीवीएन फ्लाइ एश निर्यात और घरेलू ग्राहकों को इसकी बिक्री के कार्य संलग्‍न है। सीमेंट कंपनियों के साथ एनटीपीसी स्‍टेशनों के आस पास सीमेंट ग्राइडिंग इकाइयां स्‍थापित करने की योजना बनाई जा रही है।
  • विद्युत वितरण - एनटीपीसी इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड '(एनईएससीएल), एनटीपीसी की एक पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी, वितरण और बिजली की आपूर्ति के लिए स्थापित किया गया था। एनईएससीएल ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए 'ग्रामीण विद्युतीकरण योजना' कार्यक्रम में लगी हुई है।
  • उपकरण निर्माण: विद्युत क्षेत्र में हुई अपार वृद्धि विद्युत उपकरण निर्माण क्षमता की वृद्धि को अनिवार्य बनाती है। एनटीपीसी ने विद्युत संयंत्र उपकरण निर्माण के लिए बीएचईएल और भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ संयुक्‍त उद्यम बनाया है। एनटीपीसी ने ट्रांसफॉर्मरों के निर्माण और मरम्‍मत के लिए ट्रांसफॉमर्स एण्‍ड इलेक्ट्रिकल्‍स केरल लिमिटेड (टीईएलके) में पणधारिता अर्जित की है।