कारपोरेट नागरिकता

सिंगरौली क्षेत्र में एनटीपीसी

एनटीपीसी देश की एक मात्र अग्रणी विद्युत उत्पादक कम्पनी नहीं हैं, यह सार्वजनिक क्षेत्र के उन शीर्षस्थ उपक्रमों में से एक है जो उन विभिन्न क्षेत्रों में, जहां इसकी परियोजनाएं अवस्थित हैं, लोगों के जीवन में बदलाव लाने की निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। प्रभावित लोगों के पुनर्वास तथा पुनर्स्थापना हेतु इसके निरंतर कार्य तथा साथ ही आसपास के ग्रामों में सामुदायिक विकास कार्यक्रम एनटीपीसी की नैगम सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति गहन प्रतिबद्धता का सुस्पष्ट प्रमाण हैं। इस प्रक्रिया में, एनटीपीसी की परियोजनाओं ने परियोजना प्रभावित व्यक्तियों तथा ग्रामवासियों के जीवन स्तर को सुधारने के अलावा स्थानीय ग्राम अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने में सहायता की है। एनटीपीसी के सीएसआर कार्यक्रम प्रभावित लोगों तथा विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के साथ परामर्श की प्रक्रिया के जरिए पुनर्स्थापना तथा पुनर्वास के कार्य में निरंतर सुधार ला रहे हैं।

AREA


क्षेत्र

सिंगरौली क्षेत्र दो जिलों में विस्तारित है अर्थात मध्यप्रदेष में सीधी तथा उत्तर प्रदेश में सोनभद्र। इस क्षेत्र में तीन सुपर ताप विद्युत संयंत्र/परियोजनाएं हैं- सिंगरौली, विंध्याचल तथा रिहंद। सिंगरौली तथा रिहंद संयंत्र उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में हैं जबकि विंध्याचल संयंत्र मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में है। इन्हें रिहंद जलाशय तथा नार्दर्न कोलफील्ड कम्पनी लि. द्वारा पानी व कोयले की आपूर्ति की जाती है। भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र पहाड़ियों से भरा हुआ है जिनके नीचे हजारों टन कोयला भंडार है। 50+ कि.मी. की परिधि में वन की सघनता अत्यंत कम है।

सिंगरौली क्षेत्र में भूमि इसके भौतिक लक्षणों तथा लगातार सूखे के कारण कृषि की दृष्टि से समृद्ध नहीं थी तथा यहां भारी संख्या में लोग अपनी आजीविका के लिए पारम्परिक पेशों पर निर्भर थे। वे या तो जमींदारों के खेतों में मजदूरी करते थे या वनों से सामग्री एकत्र कर अपनी आजीविका का अर्जन करते थे। लगातार सूखे के कारण अनेकों बार भोजन ऊपर से उपलब्ध कराया जाता था। प्रथम पंचवर्षीय योजना में गोविंद बल्लभ पंत सागर बांध के निर्माण के पश्चात् भी, जलाशय से दूर अवस्थित भूमि उपजाऊ नहीं थी।

एनटीपीसी की परियोजनाए

सिंगरौली सुपर ताप विद्युत संयत्र (एसएसटीपीएस)

इस विद्युत संयत्र की स्थापना 1977 में की गई थी। यह एक पिट हेड ताप विद्युत संयंत्र है जिसकी स्थापित क्षमता 2000 मेगावाट है। इसमें 200 मेगावाट की पांच यूनिट तथा 500 मेगावाट की दो यूनिट शामिल है।

इस प्रयोजनार्थ जलापूर्ति रिहंद जलाशय से प्राप्त होती है। उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली आदि अनेक राज्य इस परियोजना से उत्पादित बिजली से लाभान्वित हुए हैं।

सिंगरौली सुपर ताप विद्युत संयत्र (एसएसटीपीएस)


विंध्याचल सुपर ताप विद्युत संयंत्र

एनटीपीसी की विंध्याचल सुपर ताप विद्युत परियोजना मध्यप्रदेश के सीधी/ सिंगरौली जिले में अवस्थित है। यह परियोजना सिंगरौली क्षेत्र में है जो मध्यप्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के राज्य को जोड़ता है। यह वाराणसी शहर से लगभग 225 कि.मी. दक्षिण में स्थित है। विंध्याचल एक पिट हेड विद्युत संयंत्र है जिसकी संस्थापित क्षमता चरण-I के तहत 1260 मेगावाट (6 × 210 मेगावाट), चरण- II के तहत 1000 मेगावाट (2 × 500 मेगावाट) तथा चरण-III के तहत 1000 मेगावाट (2 ×500 मेगावाट) , चरण-IV के तहत 500 मेगावाट है। वर्तमान में इस परियोजना की कुल क्षमता 4260 मेगावाट है तथा चरण- V के तहत 500 मेगावाट की क्षमता निर्माणाधीन है।

विंध्याचल सुपर ताप विद्युत संयंत्र


रिहंद सुपर ताप विद्युत संयंत्र (आरएचएसटीपीपी)

रिहंद सुपर ताप विद्युत संयंत्र (आरएचएसटीपीपी) उत्तर प्रदेश के जिला सोनभद्र में वाराणसी से 225 कि.मी. की दूरी पर अवस्थित है। सिंगरौली क्षेत्र में यह एनटीपीसी की तीसरी परियोजना है।

रिहंद सुपर ताप विद्युत संयंत्र (आरएचएसटीपीपी) दो चरणों में 2000 मेगावाट की क्षमता वाला एक पिट हेड विद्युत केन्द्र है जिसकी पहले चरण की क्षमता 1000 मेगावाट (2 ×500 मेगावाट प्रत्येक) तथा दूसरे चरण में 1000 मेगावाट (2×500 मेगावाट प्रत्येक) है। परियोजना के चरण I , चरण II तथा चरण III में 2X500 मेगावाट को पहले ही कमीशन किया जा चुका है। वर्तमान में इस संयंत्र की कुल क्षमता 3000 मेगावाट है।

रिहंद सुपर ताप विद्युत संयंत्र (आरएचएसटीपीपी)