पर्यावरण

वनरोपण

पारिस्थितिकी संतुलन और प्रदूषणयुक्त पर्यावरण के रखरखाव को एनटीपीसी में सर्वाधिक महत्व दिया जाता है। पर्यावरण अभियोजना और संरक्षण इसकी परियोजना गतिविधियों का एक अभिन्न अंग हैं। एनटीपीसी अपनी परियोजनाओं के अंदर और इसके आस पास बढ़ते पारिस्थितिक जोखिम का मुकाबला करने के लिए संकेन्द्रित प्रयास द्वारा भूमि के बड़े हिस्सों पर वनरोपण का कार्य करता है।

लगातार खराब होते पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण और पुन: उद्धार तथा देश के आनुवांशिक संसाधनों के संरक्षण की महत्वपूर्ण आवश्यकता के कारण वायु, जल और पर्यावरण संबंधी कानूनी अधिनियम बनाने के साथ-साथ ‘वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम’ (1974) और ‘वन अधिनियम’ (1980) का अधिनियमन किया गया।

Afforestation programme 1
Afforestation programme 2

एनटीपीसी का मार्ग

एनटीपीसी के सुदृढ़ प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संबंधी गुणवत्ता और तकनीकी – आर्थिक व्यवस्था का संतोषजनक संयोजन प्राप्त करना संभव हुआ है। प्रदूषण को न्यूनतम बनाने के लिए निरंतर सतर्कता बरती जाती है। यह ऐसे अन्य पर्यावरण प्रबंधन कार्यक्रमों के अतिरिक्त है जो निर्माण गतिविधियां आरंभ होने के साथ ही शुरू होते हैं।

संयंत्र, टाउनशिप, हरित पट्टी और अन्य स्थलों के लिए समुचित वनरोपण के उपयुक्त कार्यक्रम भौगोलिक विशेषताओं के अनुसार तैयार किए जाते हैं। पेड़ों की प्रजातियों का चयन उनकी अनुकूलन क्षमता के आधार पर किया जाता है और इन्हें स्थानीय वनरोपण स्थलों पर प्रजातियों के साथ समूहबद्ध किया जाता है। इनके वितरण में इनकी वृद्धि की विशेषताएं, फूल लगने के पैटर्न और फैलाव का मूल्यांकन किया जाता है। इन विचारों से न केवल स्थान की सुंदरता में योगदान दिया जाता है बल्कि ये विद्युत संयंत्र से निकलने वाले प्रदूषणकारी उत्सर्जनों के लिए सिंक के रूप में भी कार्य करते हैं। कभी कभार ये आस पास के क्षेत्रों में मौजूद अन्य उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण से निपटने में भी सहायक होते हैं।

एनटीपीसी ने अनुभवी बागवानी अधिकारियों / पर्यवेक्षकों के नेतृत्व में अपनी परियोजनाओं के लिए स्वतंत्र बागवानी विभाग विकसित किए हैं।

मौजूदा पेड़ों को बचाते हुए निर्माण की अवस्था के आरंभ में ही पेड़ों का संरक्षण और राज्य वन विभागों तथा कृषि विश्व़विद्यालयों से सलाह लेना एनटीपीसी द्वारा अपनाए जाने वाले कुछ सामान्य मार्गदर्शी सिद्धांत हैं।

वन बैंकForest Banks

प्रत्येक राज्य में ‘वन बैंक’ बनाने का एक अभिनव प्रस्ताव शुरु किया गया है जिसमें सभी राज्यों / संघ राज्यों क्षेत्रों के वन विभागों को राज्यो के विभिन्न कार्यक्रमों के तहत पौधरोपण आरंभ करने के लिए भूमि की पहचान करनी होगी । इन क्षेत्रों में या तो राज्य अथवा केन्द्र की किसी विद्युत परियोजना को वन बैंक में मौजूद शेष पादपों की तुलना में अनिवार्य पूरक ‘वनरोपण क्षेत्र’ बनाने की सुविधा दी जाएगी।