पर्यावरण

सेनपीप – सेंटर फॉर पावर एफिशिएंसी एण्ड एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन

भारतीय ताप विद्युत संयंत्रों से ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) की मात्रा में कमी लाने के लिए एनटीपीसी द्वारा डिजाइन के चरण से लेकर प्रचालन चरण तक और स्थानीय संस्थागत क्षमताओं के निर्माण में पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से दक्ष विद्युत उत्पादन प्रौद्योगिकियों का संवर्धन इस्तेमाल किया जाता है। एनटीपीसी द्वारा यूएसएआईडी के सहयोग से कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों के समग्र निष्पादन में सुधार द्वारा उत्पन्न बिजली की प्रतियूनिट ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने के अधिदेश सहित सेनपीप – सेंटर फॉर पावर एफिशिएंसी एण्ड एनवार्यनमेंटल प्रोटेक्शन की स्थापना की गई। यह केन्द्र आधुनिकतम प्रौद्योगिकियों के अधिग्रहण, प्रदर्शन और प्रसार के लिए एक संसाधन केन्द्र के रूप में कार्य करता है और यह संपूर्ण भारत के विद्युत क्षेत्र के लिए कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों के निष्पादन सुधार हेतु कार्य करता है।

वैश्विक मौसम परिवर्तन के लिए एक विजयी मार्ग

एनटीपीसी ने सेनपीप में पर्यावरण संबंधी चिंताओं और कम्पनियों की आवश्यकताओं के बीच सहयोग प्राप्त करते हुए एक सफल कार्यनीति अपनाई है। हमने व्यापक निष्पादन अनुकूलसमीकरण कार्यक्रम की शुरूआत की है और इस प्रकार हम कार्बन डाइ ऑक्साइड उत्सर्जनों को कम करने, जो मौसम परिवर्तन का कारण होता है और विद्युत उत्पादन की उच्चतर दक्षता प्राप्त करने के दोहरे उद्देश्यों के बीच सफलतापूर्वक संतुलन करने में सफल रहे हैं।

Win Win Approach for Global Climate Change
CenPEEP for Utility Concerns and GHG Reduction

 

एनटीपीसी द्वारा भारतीय विद्युत क्षेत्र को बेहतर बनाने के प्रयासों के तहत सेनपीप अन्य प्रौद्योगिकियों तथा प्रथाओं के प्रदर्शन और प्रसार द्वारा विभिन्न राज्य विद्युत कम्पनियों को भी सहायता देता है। राज्य विद्युत बोर्डों की पहुंच बढ़ाने के लिए उत्तरी क्षेत्र (लखनऊ) और पूर्वी क्षेत्र (पटना) में सेनपीप के दो क्षेत्रीय केन्द्र भी स्थापित किए गए हैं। इस मार्ग से विद्युत संयंत्रों को महत्वपूर्ण लाभ मिले हैं और उत्सर्जनों में कमी आई है प्रौद्योगिकीय हस्तक्षेप

पर्यावरण अनुकूल प्रौद्योगिकियों और प्रथाओं की अधिक स्वीकार्यता और अंगीकार हेतु ‘प्रौद्योगिकी अधिग्रहण, प्रदर्शन और प्रसार’ की विधि अपनाई गई है। हमारा ध्यान अल्प लागत पर उच्च् ‍ लाभ के विकल्पों पर रहा है। हम प्रदर्शन और व्यापक प्रसार के दौरान स्थानीय विद्युत स्टेशनों के लोगों को भी शामिल करते हैं।

विधि और पहुंच

बॉयलर निष्पादन अनुकूलसमीकरण नैदानिकी के लिए अनुमान लगाने वाली अनुरक्षण प्रणाली तथा प्रौद्योगिकी
एयर – प्री हीटर आदि, कंडेंसर, वॉटर प्रेशर क्लिनर के लिए सर्वोत्तम प्रथाएं विश्वसनीयता केन्द्रित अनुरक्षण
कंडेंसर हिलियम लीक डिटेक्टर थर्मोडायनेमिक मॉडलिंग : निष्पादन विश्लेषण का एक साधन
भाप टर्बाइन निष्पादन आकलन और अनुकूलतमीकरण ताप लेखा परीक्षण : निम्नीकरण का शुद्ध आकलन
वास्तविक समय मापन और वायु – ईंधन अनुपात का संतुलन जोखिम मूल्यांकन और प्राथमिकता प्रदान करना
कूलिंग टावर, कंडेंसर निष्पादन अनुकूतमीकरण> नई ओवरहॉल प्रथाएं आरंभ करना
बॉयलर ग्रिड मास फ्लो सेपरेशन  ऑनलाइन सीडब्ल्यू  प्रवाह मापन

स्थानीय पर्यावरण सुरक्षा के लिए अतिरिक्त हस्तक्षेप :

धुले हुए कोयले द्वारा ऊष्मा दर पर प्रभाव के इस्तेमाल और पिट हैड स्टेशन के लिये इसकी तकनीकी व्यवहार्यता, खानों में एश हॉल बैक की तकनीकी व्यवहार्यता, भारतीय विद्युत संयंत्रों के लिए राख प्रतिरोधकता मापनों की सुविधाएं स्थापित करना।

भागीदार

अमेरिकी ऊर्जा सचिव द्वारा 1994 में उद्घाटित सेनपीप भारतीय थर्मल पावर क्षेत्र में विद्युत संयंत्रों के निष्पादन अनुकूलसमीकरण तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए अनेक लागत प्रभावी प्रौद्योगिकियाँ आरंभ करने के लिए एक अग्रणी राष्ट्रीय संसाधन केन्द्र के रूप में विकसित हुआ है। सेनपीप को यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएड) द्वारा अमेरिकी ऊर्जा विभाग, नेशनल एनर्जी टेक्नोलॉजी लैब (एनईटीएल), इलेक्ट्रिक पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट (ईपीआरआई), स्ट्रक्चरल इंटीग्रीटी एसोसिएट्स (एसआई), जनरल फिजिक्स के माध्यम से, टेनेसी वेली एथॉरिटी (टीवीए), रिलाएंट एनर्जी, मेरेंट कॉर्पोरेशन और यूएस युटिलिटी संगठन जैसे ईपीआरआई, यूएसए एनर्जी एसोसिएशन (यूएसईए) आदि से क्षमता निर्माण हेतु तकनीकी सहायता मिली है। अपनी अनोखी प्रबंधन संरचना के साथ यह सुनिश्चित करता है कि इसकी पहलें क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संगत हैं।

सेनपीप में सलाहकार बोर्ड और कार्यपालक समिति सहित विलक्षण प्रबंधन संरचना है।

प्रभाव

सेनपीप ने एनटीपीसी के अनेक स्टेशनों और राज्य विद्युत स्टेशनों पर निष्पादन आकलन तकनीकों का प्रदर्शन किया है। इन परीक्षणों में सर्वोत्तम संचालित विद्युत बोर्ड के स्टेशनों में ऊष्मा दर सुधार संभाव्यथता का परीक्षण किया गया है। अनेक प्रदर्शन तकनीकों और प्रथाओं को इन स्टेशनों द्वारा अपनाया गया है । सेनपीप के प्रयासों से एनटीपीसी और एसईबी को कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम करने में सहायता मिलती है। कुछ राज्य कम्पनियों ने प्रतिवर्ष 4.5 मिलियन टन से भी अधिक उत्सर्जन कम करने में सेनपीप के द्वारा दी जाने वाली सहायता के लिये आभार व्यक्त है। इसने टीवीए के साथ मिलकर संयुक्त रूप से ‘’ उष्मा दर सुधार मार्गदर्शी सिद्धांत’’ तैयार किया है और इसे भारत के सभी कोयला आधारित विद्युत स्टेशनों में परिचालित किया है। यह नियमित रूप से ‘’परफॉर्मेंस ऑप्टीमाइज़र’’ का प्रकाशन करता है जो अनुकूलतमीकरण अनुभवों का सार होता है।

केन्द्र द्वारा विद्युत क्षेत्र के व्यावसायिकों को प्रशिक्षित करने के लिए कार्यशालाओं / प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है।