नेत्रा

सीसीएस पर राष्ट्रीय कार्यशाला

भारत निम्न कार्बन उत्सर्जन नीति अपनाने के मार्ग पर अग्रसर

“भारत के विकास के लिए कोयले से विद्युत उत्पादन अपरिहार्य है और भारत स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों, मौजूदा विद्युत संयंत्रों की दक्षता में सुधार, नवीकरणीय ऊर्जा पर अधिक बल तथा ऊर्जा संरक्षण आदि को अपनाकर CO2 उत्सर्जन को कम करने के लिए निम्न कार्बन उत्सर्जन नीति को अपना रहा है” - भारत सरकार के विद्युत सचिव श्री पी उमा शंकर ने एनटीपीसी द्वारा आयोजित कार्बन कैप्चर और भंडारण की राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा।

इस राष्ट्रीय कार्यशाला के प्रतिष्ठित प्रतिभागियों में पर्यावरण और वन मंत्रालय, इस्पात मंत्रालय, एनटीपीसी, सेल, डीवीसी, ओएनजीसी, बीएचईएल आदि के प्रतिनिधि तथा गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और प्रख्यात आईपीपी आदि शामिल थे। सीईए तथा डीएसटी के प्रतिनिधि, आईआईटी, आईआईएम, सीएसआईआर प्रयोगशालाओं और सीपीआरआई के वैज्ञानिक और शिक्षाविद भी वहाँ उपस्थित थे।

श्री अशोक लवासा, अपर सचिव (विद्युत), भारत सरकार ने कहा कि भारत में कोयला पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और यह विद्युत उत्पादन का मुख्य ईंधन बना रहेगा। श्री डी के जैन, निदेशक (तकनीकी), एनटीपीसी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यशाला भारत में सीसीएस प्रयास की भावी कार्यनीति तय करने में उपयोगी सिद्ध होगी।

National workshop on Carbon Capture & Storage

श्री अशोक लवासा, अपर सचिव (विद्युत); श्री ए एस बक्शी, अध्यक्ष, सीईए; श्री वी एस वर्मा, सदस्य सीईआरसी; श्री एच एल बजाज, पूर्व सदस्य अपील ट्रिब्यूनल; और श्री डी के जैन, निदेशक (तकनीकी) एनटीपीसी लिमिटेड ने इस अवसर पर आयोजित पैनल चर्चा में भाग लिया ।