एनटीपीसी स्कूल ऑफ बिजनेस ने आयोजित किया चौथा दीक्षांत समारोह, 148 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर डिप्लोमा एवं 18 मेधावियों को पदक

नोएडा, 27 जून 2026: एनटीपीसी स्कूल ऑफ बिजनेस (एनएसबी), नोएडा ने 27 जून 2026 को अपना चौथा दीक्षांत समारोह आयोजित किया। यह अवसर संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता और भावी प्रबंधन नेतृत्व के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा।
समारोह में संस्थान के एआईसीटीई-अनुमोदित कार्यक्रमों से उत्तीर्ण 148 विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्रदान किए गए। इनमें से 18 विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए पदकों से सम्मानित किया गया।
दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता एनएसबी के गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष श्री गुरदीप सिंह ने की। इस अवसर पर एनटीपीसी एजुकेशन एंड रिसर्च सोसाइटी (NEARS) के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार जाडली, गवर्निंग कमेटी की अध्यक्षा श्रीमती रचना सिंह भाल तथा एनटीपीसी स्कूल ऑफ बिजनेस के कार्यवाहक निदेशक डॉ. आर. गोपीचंद्रन भी उपस्थित रहे।
यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों का उत्सव होने के साथ-साथ एनटीपीसी स्कूल ऑफ बिजनेस की शैक्षणिक उत्कृष्टता, उद्योगोन्मुख शिक्षा, नवाचार तथा समाज पर सकारात्मक प्रभाव सृजित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराने का भी अवसर बना।
एनटीपीसी स्कूल ऑफ बिजनेस के बारे में
भारत सरकार का महारत्न उपक्रम एनटीपीसी लिमिटेड, 90 गीगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता के साथ भारत की सबसे बड़ी एकीकृत ऊर्जा कंपनी है। एनटीपीसी लिमिटेड, एनटीपीसी एजुकेशन एंड रिसर्च सोसाइटी (NEARS) को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी सोसाइटी के तत्वावधान में वर्ष 2014 में एनटीपीसी स्कूल ऑफ बिजनेस (एनएसबी) की स्थापना ऊर्जा क्षेत्र के लिए सक्षम मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से की गई।
एनटीपीसी स्कूल ऑफ बिजनेस में एआईसीटीई-अनुमोदित दो कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं - पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट–एग्जीक्यूटिव (PGDM-E) तथा पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन एनर्जी मैनेजमेंट (PGDM-EM)। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य ऊर्जा प्रबंधन के क्षेत्र में विभिन्न स्तरों पर प्रबंधकीय क्षमता, नेतृत्व कौशल तथा निर्णय-निर्माण दक्षता को सुदृढ़ बनाना है। ऊर्जा प्रबंधन पर विशेष फोकस के साथ एनएसबी ज्ञान-आधारित, मूल्यवर्धित शैक्षणिक एवं शोध सेवाएं प्रदान करता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के सतत विकास में योगदान देती हैं।